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तलाक पर इंसाफ अभी अधूरा है, क्या है तलाक ए हसन?

MKNews.in | Desk

रूप में प्रथा को खत्म करने की मांग की गई थी। जिसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट में तलाक-ए-हसन के खिलाफ एक और याचिका दायर की गई है। मुंबई की रहने वाली नाजरीन निशा ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

खत्म हो तलाक ए हसन की प्रथा

तलाक-ए-हसन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत एक जनहित याचिका के रूप में एक नई रिट याचिका दायर की गई है, जिसमें तलाक-ए-हसन सहित एकतरफा अतिरिक्त न्यायिक तलाक के सभी रूपों को शून्य और असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। मुंबई की रहने वाली नजरीन निशा ने एडवोकेट आशुतोष दुबे के जरिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने केंद्र को तलाक के लिए लिंग-तटस्थ, धर्म-तटस्थ समान आधार और सभी के लिए तलाक की एक समान प्रक्रिया के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के लिए भी प्रार्थना की है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि उसकी शादी मुस्लिम रीति-रिवाज से हुई थी और उसके माता-पिता को दहेज देने के लिए मजबूर किया जा रहा था और इसके लिए उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। याचिकाकर्ता को अपर्याप्त दहेज के कारण पीड़ित किया गया था और जल्द ही पति के परिवार द्वारा प्रताड़ना बार-बार शारीरिक हमले में बदल गई। याचिकाकर्ता ने बताया कि वह बीमार पड़ गई और उसे टीवी का पता चला जिसके बाद उसके पति ने उसे उसके माता-पिता के पास छोड़ दिया और उसे वापस लाने से इनकार कर दिया और बिना किसी कारण के उसे चरित्रहीन और वेश्या कहकर उसके चरित्र पर हमला किया। याचिकाकर्ता के पति ने उसे टेक्सट मैसेज के माध्यम से तलाक-ए-हसन दिया और कहा कि वह उसके लिए अनुपयुक्त है और उसे किसी भी मामले में उसकी जरूरत नहीं है।

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