उत्तर प्रदेशधर्म

शारदीय नवरात्रि के पंचमी तिथि पर स्कंदमाता के दर्शन को भक्तों की लगी लंबी लाइन,छात्र-छात्राएं करते हैं दर्शन

कमल के फूल पर मोहित होती है मां स्कंदमाता

mknews/वाराणसी/रिपोर्ट श्वेताभ सिंह

 

शुक्रवार को नवरात्रि के पंचमी तिथि पर आदि शक्ति के स्कंदमाता रूप की पूजा अर्चना करने का विधान है। वाराणसी में माता स्कंदमाता का मंदिर जैतपुरा स्थित है। शुक्रवार भोर से ही माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लग गई। विधि-विधान से मां के दर्शन कर भक्तों ने विद्या और बुद्धि का वरदान मांगा। ऐसा माना जाता है कि कार्तिकेय के जन्म के साथ ही माता का नाम स्कंदमाता था। उन्हें पीली वस्तु और कमल का फूल बहुत प्रिय है।

दर्शन-पूजन कर श्रद्धालुओं हुए निहाल 

दर्शन करने आई ऋतु सिंह ने कहा कि माता के दर्शन से महिलाओं को सौभाग्य प्राप्त होता है। सिद्धपीठ के रूप में इसकी मान्यता है। माता के दर्शन से विद्या व बुद्धि की प्राप्ति होती है। स्कंदमाता के दर्शन करने वाली महिलाओं को पुत्र की प्राप्ति होती है।

छात्र-छात्राएं करते हैं दर्शन 

स्कंदमाता बागेश्वरी देवी के रूप में वाराणसी के जैतपुरा में विराजमान हैं। इन्हें ज्ञान की देवी कहा जाता है। इसलिए यहां दर्शन-पूजन के लिए छात्र-छात्राओं की भी भीड़ रहती है। विद्यार्थी देवी का दर्शन-पूजन कर विद्या और ज्ञान का आशीर्वाद मांगते हैं। ऐसी मान्यता है कि पूरी श्रद्धा के साथ आराधना करने पर देवी सद्बुद्धि और ज्ञान का वरदान भक्तों को देती हैं।

 

स्कंदमाता मंदिर के पुजारी गोपाल मिश्रा ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन देवी के स्कंदमाता स्वरूप के दर्शन-पूजन का विशेष लाभ मिलता है। ऐसी मान्यता है कि महिषासुर ने जब तक किया था तभी कार्तिकेय का जन्म हुआ था। कार्तिकेय के नाम पर देवी का स्कंदमाता पड़ा। माता को पीली वस्तुएं केला, नारियल, चुनरी प्रिय हैं। कमल का फूल सबसे अधिक प्रिय है।

 

 

 

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