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11 साल बाद भी हर दिल में गूंजते हैं जगजीत सिंह, इन 10 गजल से दीजिए श्रद्धांजलि

जगजीत सिंह की फिल्मी गीत गाने पर हुई थी पिटाई

MKNews/ रिपोर्ट श्वेताभ सिंह 

 

गजल की दुनिया में जगजीत सिंह यूं ही सम्राट नहीं बन गए. एक समय था, जब वे पाई-पाई के मोहताज थे। जगजीत सिंह जब पहली बार मुंबई गए तो उनके पास थोड़े से ही पैसे थे। इतने कम कि 7 दिन गुजारा करना भी मुश्किल था. उन्होंने वहां बहुत हाथ-पांव मारा और जब कुछ हाथ नहीं लगा तो वापस घर लौटना तय कर लिया। जगजीत सिंह पर लिखी किताब ‘दास्तान ए जगजीत‘ में राजेश बादल ने लिखा है कि उनके पास तब रेल टिकट खरीदने तक के पैसे नहीं थे।

बिना टिकट के ही जगजीत सिंह ट्रेन पर चढ़ गए और जब टिकट चेकिंग करने के लिए टीटीई आए तो वे टॉयलेट में छिप गए। जगजीत सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा है. आज उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं उनके जीवन के कुछ दिलचस्प किस्सों के बारे में।

 

फिल्मी गीत गाने पर हुई थी पिटाई

जगजीत सिंह का नाम पहले जगमोहन हुआ करता था. उनके पिता सिख धर्म से प्रभावित थे और उन्होंने सिख धर्म अपना लिया था. वह एक नामधारी सिख थे जो अपने धर्म के पक्के थे। वे जगजीत सिंह को संगीत सिखाना और गुरुवाणी का पाठ कराना चाहते थे. वे चाहते थे कि उनका बेटा जगमोहन गुरुद्वारों में शबद कीर्तन करे। उन्होंने जगजीत सिंह को बाकायदा संगीत की शिक्षा दिलाई।

एक बार ऐसा हुआ कि जगमोहन के मुंह से फिल्मी गीत निकल गया. पिता ने उनकी इतनी पिटाई की थी कि जगजीत सिंह को बचाने के लिए उनकी बहन को उनके देह पर गिरना पड़ा। तब जाकर कहीं उनके पिता रुके। एक बार जब उनके पिता जगमोहन को संगीत गुरु के पास ले गए तो जगजीत का गीत सुनकर कहा था कि यह लड़का जग जीतेगा और तभी से उन्होंने जगमोहन का नाम बदलकर जगजीत कर दिया।

 

जब पहले एलबम के लिए हटवाई दाढ़ी-मूंछ

अपने कॉलेज के दिनों में ही जगजीत सिंह बहुत पॉपुलर थे। उन्होंने अपने कई प्रोफेसर्स को प्रभावित किया था. लेकिन संगीत के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। ऐसे में प्रोफेसर परीक्षा में उन्हें नकल भी करवा दिया करते थे। एक बार जब जगजीत सिंह के काफी प्रयास के बाद उनका एलबम रिलीज के लिए तैयार हुआ, तो कंपनी ने शर्त रखी कि एलबम के कवर के लिए उन्हें अपनी दाढ़ी-मूंछ हटवानी पड़ेगी। यह जगजीत के लिए धर्म संकट था, क्योंकि उनके पिता एक नामधारी सिख थे।

करियर के लिए जगजीत सिंह इस बात पर भी राजी हो गए. उन्होंने संगीत को प्राथमिकता दी और पिता के गुस्से का खतरा झेलते हुए क्लीन शेव करवा लिया। हालांकि उन्होंने धर्म से कोई समझौता नहीं किया और पक्के धार्मिक बने रहे।

 

जगजीत सिंह के संघर्ष के दिनों में ही उनके जीवन में चित्रा आईं. चित्रा भी गायिका थीं। वह पहले जगजीत की दोस्त बनी, फिर प्रेमिका और फिर पत्नी भी गजल की दुनिया में दोनों एक फनकार जोड़ी बनकर उभरे। दोनों की जुगलबंदी खूब फेमस हुई और संगीत प्रेमियों के बीच खूब पसंद की जाने लगी। दोनों को तेजी से काम मिलने लगा। दोनों ने कई हिट एलबम दिए. इस जोड़ी ने न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी खूब नाम कमाया।

चिट्ठी न कोई संदेश…, कोई फरियाद… जगजीत सिंह गजल की दुनिया में वो आवाज हैं, जिन्‍होंने इस विधा को सबसे पॉपुलर बनाया। जगजीत को यह श्रेय जाता है कि उन्‍होंने युवाओं को गजल की दुनिया से जोड़ा। हारमोनियम और तबले से आगे बढ़कर उन्‍होंने गजल में आज के म्‍यूजिकल इंस्‍ट्रूमेंट्स का साथ लिया। यही कारण है कि उनके गाये हुए गजल गीतों में शायर भले ही कई थे, लेकिन जगजीत एक ही थे। उन्होंने हर गजल को जैसे खुद जीया और फिर गाया हो। आज भले ही वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी गायि‍की का जादू आज भी बरकरार है। जगजीत सिंह को साहित्य अकादमी, पद्म भूषण जैसे कई सम्मान से नवाजा गया है। आइए जगजीत सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि‍ देते हुए उनके इन 10 सबसे खास नगमों को एक बार फिर सुनते हैं।

कोई फरियाद

https://youtu.be/8MN2bxMiB9A

चिट्ठी न कोई संदेश

https://youtu.be/wMeggXRc0ys

आप को देखकर देखता रह गया

https://youtu.be/jAHbVWO6LnQ

तुमको देखा तो ये खयाल आया 

https://youtu.be/-GRqHkV9Bls

होठों से छू लो तुम

https://youtu.be/o6XMWRgx908

होश वालों को खबर क्या

https://youtu.be/ag3ENMEV89o

झुकी झुकी सी नजर

https://youtu.be/xY2P6IAd0MI

ये तेरा घर ये मेरा घर

https://youtu.be/UOMjKWrfI0U

तेरे आने की जब खबर महके

https://youtu.be/-G_Xi_x4g1s

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो

https://youtu.be/C8eAKT-zQXk

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